The easiest and home remedy to avoid the problem of Piles (hemorrhoids) or to get rid of the problem

बवासीर की समस्या से बचने का या समस्या से निजात पाने का सबसे आसान व घरेलू नुस्खा

क्या होती है पाइल्स बवासीर (piles)
बवासीर या पाइल्स  यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें  गुदा के अंदरूनी और बाहरी क्षेत्र में और मलाशय के निचले हिस्से की शिराओं में सूजन आ जाती है। इसकी वजह से ऐनस के अंदर और बाहर या किसी एक जगह मस्से जैसी स्थिति बन जाती है जो कभी अंदर रहते हैं और कभी बाहर भी आ जाते हैं। करीब 70 फ़ीसदी लोगों को अपने जीवन में किसी न किसी वक्त बवासीर या पाइल्स  की समस्या रही है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ पाइल्स की समस्या बढ़ सकती है। अगर परिवार में किसी को यह समस्या रही है तो इसके होने की आशंका बढ़ जाती है। अनुवांशिक समस्या है।

लक्षण
आमतौर पर पाइल्स बहुत ज्यादा गंभीर नहीं होते और तीन-चार दिन में अपने आप ठीक हो जाते हैं। कई बार तो लोगों को पता भी नहीं चलता कि उन्हें पाइल्स है। वैसे पाइल्स के यह लक्षण हो सकते हैं।
(1) -  ऐनस के इर्द-गिर्द कठोर गांठ जैसी महसूस हो सकती है। इसमें ब्लड हो सकता है जिसकी वजह से इसमें काफी दर्द होता है।
(2) -  टॉयलेट के बाद भी ऐसा महसूस होना कि पेट साफ नहीं हुआ है।
(3) -  मल त्याग के वक्त लाल चमकदार रक्त का आना।
(4) -  मल त्याग के वक्त म्यूकस का आना और दर्द का एहसास होना।
(5) -  एनस के आसपास खुजली होना और उस क्षेत्र का लाल और सूजन आ जाना।

उपचार
दो सूखे अंजीर शाम को पानी में भिगो दें। सवेरे खाली पेट उनको खाएं इसी प्रकार सवेरे के भिगोए हुए दो अंजीर शाम को खाएं। एक घंटा आगे पीछे कुछ ना लें 8 से 10 दिन के सेवन से बादी और खूनी हर प्रकार की बवासीर ठीक हो जाती है।
बवासीर को जड़ से दूर करने के लिए और पुनः ना होने देने के लिए छाछ सर्वोत्तम है। दोपहर के भोजन के बाद छाछ में डेढ़ ग्राम (चौथाई चम्मच) पिसी हुई अजवायन और 1 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर पीने से बवासीर में लाभ होता है और नष्ट हुए बवासीर के मस्से पुनः उत्पन्न नहीं होते।

बवासीर के मस्सों पर लगाने के लिए - कपूर को 8 गुना थोड़ा गर्म अरंडी के तेल में (आग से नीचे उतारकर) मिला व घोल कर रख लें। पखाना करने के बाद मस्सों को धोकर और पौंछकर इस तेल को दिन में दो बार नरमी से मस्सों पर इतना मले की मस्सों में शोषित हो जाए। इस तेल की नरमी से मालिश से मस्सों की तीव्र शोथ, दर्द, जलन, सुईयाँ चुभने, में आराम आता है और निरंतर प्रयोग से मस्से खुश्क हो जाते हैं। बवासीर के मस्से सूजकर अंगूर की भांति मोटे हो जाते हैं और कभी-कभी गुदा से बाहर निकल आते हैं। ऐसी अवस्था में यदि उन पर इस तेल को लगा कर अंदर किया जाए तो दर्द नहीं होता और मस्से नरम होकर आसानी से गुदा के अंदर प्रवेश किए जा सकते हैं।

सहायक उपचार
(1) -  बवासीर की उग्र अवस्था में भोजन में केवल दही और चावल मूंग की खिचड़ी लें। देसी यह प्रयोग में लाएं। मल को सख्त और कब्ज ना होने दें। अधिक तेज मिर्च-मसालेदार उत्तेजक और गरिष्ठ पदार्थों के सेवन से बचें।
(2) - खूनी बवासीर में छाछ और दही के साथ कच्चा प्याज खाना चाहिए ।
(3) - रक्तस्रावी बवासीर में दोपहर के भोजन के एक घंटा बाद आधा किलो अच्छा पपीता खाना हितकर है।
(4) - बवासीर चाहे कैसी भी हो बादी हो अथवा खूनी कच्ची मूली (पत्तों सहित) खाना या उसके रस का 25 से 50 ग्राम की मात्रा से कुछ दिन सेवन करने से बवासीर के अतिरिक्त रक्त के दोषों को निकालकर रक्त को शुद्ध करता है।

विशेष
(1) -  बवासीर से बचने के लिए गुदा को गर्म पानी से न धोएँ। खासकर जब तेज गर्मियों के मौसम में छत की टंकियों व नलों से बहुत गर्म पानी आता है तब गुदा को उस गर्म पानी से धोने से बचना चाहिए।
(2) -  एक बार बवासीर ठीक हो जाने के बाद बदपरहेजी के कारण उसके दोबारा होने की संभावना रहती है।.. बवासीर के रोगी के लिए बदपरहेजी से बचना परम आवश्यक है।