Ayurvedic Treatment of Eye Diseases like Cataract

मोतियाबिंद जैसे आंखों के रोगों का आयुर्वेदिक उपचार

आंखों में होने वाली सबसे आम समस्या में मोतियाबिंद को मुख्य माना जाता है।  अधिकांश यह रोग या समस्या संभवतः 50 से ऊपर की उम्र वाले लोगों में देखी जाती है। पर देखा जाए तो आज के इस भागमभाग भरे जीवन में या गलत खानपान के चलते इसके अतिरिक्त अधिक तनावयुक्त जीवन में यह समस्या नई उम्र के व्यक्तियों में भी काफी आम हो गई है। अधिकतर यह देखा गया है की 60 या इससे ऊपर की आयु वाले व्यक्तियों में से 45% व्यक्तियों में मोतियाबिंद की समस्या पाई जाती है या उत्पन्न होने लगती है। मोतियाबिंद वह समस्या है जिसमें प्रकृति द्वारा आंखों में दिया गया लेंस बढ़ती उम्र के साथ धीरे - धीरे कमजोर होने लगता है और एक उम्र पर आकर वह बिल्कुल खराब हो जाता है जिससे पीड़ित व्यक्ति को देखने में धुंधला महसूस होता है। इस समस्या को ही आप और हम मोतियाबिंद नाम से जानते हैं।  इस समस्या को गहराई से समझने के लिए दूसरी तरह से यह भी कह सकते हैं की प्राकृतिक लेंस बढ़ती उम्र के साथ आंखों के परदे से ढीला हो जाता और अपनी जगह छोड़ देता है  जिसके कारण आंखों के परदे तक रोशनी नहीं पहुंच पाती जिसकी वजह से मनुष्य को देखने में बाधा उत्पन्न होने लगती है। यदि सही या ठीक तरह से इस समस्या का इलाज नहीं कराया तो धीरे-धीरे मनुष्य की आंखों में अंधापन आने लगता है जिससे मनुष्य कुछ भी देख पाने में असमर्थ हो जाता है ऐसी अवस्था में मनुष्य दूसरों पर निर्भर होने लगता है क्योंकि वह स्वयं कुछ भी देख पाने में असमर्थ है तो कोई भी काम करने में असमर्थ हो जाएंगे और उन्हें दूसरों पर निर्भर होना पड़ेगा

मोतियाबिंद जैसे आंखों के रोगों का आयुर्वेदिक उपचार (Ayurvedic Treatment of Eye Diseases like Cataract)

10 ग्राम की मात्रा में सफेद प्याज का रस ले लें इसमें 2 ग्राम की मात्रा में भीमसेनी कपूर और 10 ग्राम की मात्रा में छोटी मधुमक्खियों द्वारा उत्पन्न पतला शहद ले लें इन तीनों सामग्रियों को खूब अच्छी तरह से मिलाकर किसी साफ कांच की के पात्र में रख लें। अब उत्पन्न मिश्रण में से रात को सोने से पहले पतली कांच की सलाई की सहायता से औषधि को आंखों में लगाने से प्रारंभिक अवस्था  का मोतियाबिंद भी तत्काल रूप से बंद हो जाता है। यदि मोतियाबिंद उतरा हुआ हो तो भी इस चमत्कारिक औषधि से साफ हो जाएगा। यदि किसी भी व्यक्ति को भीमसेनी कपूर ना मिल पाए तो वह सिर्फ सफेद प्याज का रस और छोटी मधुमक्खी का पतला शहद से भी उपचार शुरू कर सकता है।

विशेष

मोतियाबिंद के प्रारंभिक अवस्था में केवल छोटी - छोटी मधु मक्खियों से उतपन्न शुद्ध पतला शहद प्रतिदिन प्रातः नियमित रूप से कांच की सलाई  की सहायता से लगाते रहने से या प्रतिदिन एक बूंद आंखों में तीन-चार सप्ताह तक औषधि का प्रयोग करने से निश्चित रूप से लाभ मिलेगा  इसके अतिरिक्त आंखों में काला पानी या काले मोतियाबिंद से बचाव होगा क्योंकि शहद से नेत्रों की पुतली की पारदर्शिता बढ़ती है और आंखों का तनाव भी कम हो जाता है। शुद्ध मधु को काँच की सलाई से रोजाना प्रातः नेत्रो में लगाने से या लगाते रहने से देखने की क्षमता बढ़ती है और नेत्रों की ज्योति भी बढ़ती है। इसके अतिरिक्त और भी कई नेत्र रोगों में भी काफी लाभ मिलता है। तथा नेत्रों की बीमारियां दूर होती हैं दृष्टि कभी कमजोर नहीं होगी। स्वस्थ आंखों में शुद्ध मधु की एक बूंद कांच की सलाई से दो बार सप्ताह में डालने से दृष्टि कभी कम नहीं होगी बल्कि जैसे जैसे उम्र बढ़ेगी वैसे - वैसे रोशनी तेज होगी उसके साथ-साथ यदि चार बादाम रात भर पानी में भिगोए हुए और सवेरे उनका छिलका उतारकर काली मिर्च के साथ बारीक पीसकर मिश्री के साथ चाटें या वैसे ही चबा - चबा कर खा लें और उसके बाद दूध पी लें तो आपको आश्चर्यचकित कर देने वाला लाभ मिलेगा।

विकल्प

शुरुआती मोतियाबिंद में  स्वयं के ताजे स्वमूत्र की दो बूंदें को आंखों में प्रतिदिन दो - तीन बार डालने से प्रारंभिक मोतियाबिंद या शुरुआती मोतियाबिंद  को उपरोक्त उपाय (ताजे स्वमूत्र की दो बूंदेंसे ठीक किया जा सकता है या और अधिक बढ़ने से रुक जाता है। स्वमूत्र को कांच की चौड़े मुंह की शीशी में स्वतः ठंड़ा होने तक ढ़क कर रख दें फिर ठंडा होने पर इससे आंखों को धोऐं या कुछ बूंदें आंखों में डाल लें यह प्रयोग आप 50 से 60 दिनों तक करके देखें।

नेत्रों के लिए उपयोगी आवश्यक: आंवला, -मुरब्बा, कद्दूकस किया हुआ आंवला, पका आम, पपीता, मक्खन, दूध, घी, मधु, काली मिर्च, घी बूरासौंफ, मिश्री, बदाम, आदि।

 

परहेज : चीनी, मैदा, खीर, धुले हुए चावल, हलवा, उबले हुए आलू, अधिक चिकनाई वाले भोज्य पदार्थ, कॉफी, चायमदिरा (शराब), टोफियाँ, चॉकलेट, अचार आदि सेवन वर्जित है।